| वन्दे मातरम् |
| मानवता के लिए
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| आओ मिलकर करें प्रतिज्ञा
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| मनुष्य तु बड़ा महान
है |
| जाग उठा मज़दूर देश का
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| अब भारत में मज़दूरों का
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| हमको अपने केसरिया पर
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| वन्दे
मातरम् |
| वन्दे मातरम् । |
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| सुजलां सुफलां मलयजशीतलां
। |
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| शस्य श्यामलां, मातरम् ।
। |
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| शुभ्र-ज्योत्सनां पुलकितयामिनी,
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| फुल्ल-कुसुमित-द्रुमदल-शोभिनी,
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| सुंहासिनीं सुमुध्र भाषिणीं
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| सुखदां वरदां मातरम् । |
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कोटि-कोटि कंठ- |
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कलकल-निनाद-कराले |
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कोटि-कोटि भुजैर्धृतखरकरवाले,
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अबला केनो माँ एतो बले |
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बहुबल धरिणीं, नमामि तारिणीं
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रिपुदलवारिणी, मातरम् । |
| तुमि विद्या, तुमि धर्म ।
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| तुमि ह्रदि तुमि मर्म, |
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| त्वं हि प्राणा: शरीरे ।
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| बाहुते तुमि माँ शक्ति, |
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| ह्रदये तुमि माँ भक्ति, |
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| तोमारइ प्रतिमा गड़ि |
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| मन्दिरे मन्दिर । |
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त्वं हि दुर्गा, दशप्रहरण-धारिणी
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कमला कमल-दल-विहारिणीं, |
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वाणी विद्या-दायिनी नमामि
त्वां |
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नमामि कमलां, अमलां, अतुलां,
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सुजलां, सुफलां, मातरम् ।
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| श्यामलां, सरलां, सुस्मितां,
भूषितां |
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| धरणी, भरणीं मातरम् । वन्दे
मातरम् । । |
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| मानवता
के लिए उषा की किरण जगाने वाले हम |
शोषित, पीडित,
दलित जनों का भाग्य बनाने वाले हम |
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हम अपने श्रम
सीकर से ऊसर में स्वर्ण उगा देंगे |
कंकड पत्थर
समतल कर कांटों में फूल खिला देंगे |
सतत परिश्रम
से अपने हैं वैभव लाने वाले हम |
शोषित, पीडित,
दलित जनों का भाग्य बनाने वाले हम |
अन्य किसी
के मुंह की रोटी हरना अपना काम नहीं |
पर अपने अधिकार
गंवा कर, कर सकते आराम नहीं |
अपने हित
औरों के हित का मेल मिलाने वाले हम |
शोषित, पीडित,
दलित जनों का भाग्य बनाने वाले हम |
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रोटी, कपडा,
मकान, शिक्षा आवश्यकता जीवन की |
व्यक्ति और
परिवार सुखी हो तभी मुक्ति होती सच्ची |
हँसते – हँसते
राष्ट्र कार्य में शक्ति लगाने वाले हम |
शोषित, पीडित,
दलित जनों का भाग्य बनाने वाले हम |
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भारत माता
का सुख गौरव प्राणों से भी प्यारा है |
युग – युग
से मानव हित करना शाश्वत धर्म हमारा है |
जीवन शक्ति
उसी माता को भेंट चढाने वाले हम |
शोषित, पीडित,
दलित जनों का भाग्य बनाने वाले हम |
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| आओ मिलकर करें प्रतिज्ञा, भारत
के सम्मान की । |
| फिर से वैभव हो दुनिया में, जय
हो हिन्दूस्तान की । । |
| हम भारत के भारत अपना, भारत की
संतानें हम । |
| इस पर सब कुछ अपर्ण कर दें, अपना
जीवन तन मन धन । |
| नहीं है कोई इससे ज़्यादा, कीमत
अब संसार की । । |
| फिर से वैभव हो दुनिया में, जय
हो हिन्दुस्तान की । । |
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| एक बार क्या बार बार हम, अपना जीवन
वारेंगे । |
| भारत मां की बली – वेदी पर, अपना
शीश उतारेंगे । |
| छोड के सब कुछ आज लगा दें, बाजी
अपने प्राण की । । |
| फिर से वैभव हो दुनिया में, जय
हो हिन्दुस्तान की । । |
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| निर्माणों की दौड़ में हम सब, अपना
मूल नहीं भूलें । |
| जीवन में निस्वार्थ रहें हम, असमंजस
में ना झूलें । |
| आज नहीं वह, अब करनी है प्रक्रिया
निर्माण की । । |
| फिर से वैभव हो दुनिया में, जय
हो हिन्दुस्तान की । । |
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| एक मंत्र का जाप करें हम, संघे
शक्ति कलौयुगे । |
| मिलकर बोले एक साथ सब, भारत की
जय युगे – युगे । । |
| आंख मूंद कर नही सहेंगे, हालत अब
अपमान की । |
| फिर से वैभव हो दुनिया में, जय
हो हिन्दुस्तान की । । |
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| धरती की शान, विश्वकर्मा की संतान,
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| तेरी मुट्ठियों मे बन्द तुफान है
रे, |
| मनुष्य तु बड़ा महान है.........
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| तू जो चाहे तो पर्वत, पहाड़ों को
फोड़ दे, |
| तू जो चाहे तो नदियों के मुख को
भी मोड़ दे, |
| तू जो चाहें तो माटी से अमृत निचोड़
दे, |
| तू जो चाहें तो धरती को अम्बर से
जोड़ दे, |
| अमर तेरे प्राण, मिला तुझको वरदान,
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| तेरी आत्मा में स्वयं भगवान रे
। 1 । |
| मनुष्य तु बड़ा महान है.........
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| नयनों में ज्वाला तेरी गति में
भूचाल, |
| तेरी छाती में छुपा महाकाल है,
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| पृथ्वी के लाल, तेरा हिमगिरी सा
भाल, |
| तेरी भृकुटि मे ताण्डव का ताल है,
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| निज को जान, जरा शक्ति पहचान, |
| तेरी वाणी में युग का आहवान है,
रे । 2 । |
| मनुष्य तु बड़ा महान है.........
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| धरती सा धीर, तू है अग्नि सा वीर
|
| तू जो चाहे तो काल को भी थाम ले,
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| पापों का प्रलय रुके, पशुता का
शीश झुके, |
| तू जो अगर हिम्मत से काम ले, |
| गुरू सा गतिमान, पवन सा तू गतिमान,
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| तेरी नभ से ऊंची उडान है, रे ।
3 । |
| मनुष्य तु बड़ा महान है.........
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| भारतीय मज़दूर संघ अब, सबको राह
दिखायेगा । |
| जाग उठा मज़दूर देश का, परिवर्तन
अब आयेगा । |
| सबको राह दिखायेगा । |
| किसान मज़दूर कर्मचारी सब, जनता
अपने साथ है । |
| भारत के कोन कोन मै फैला अपना काज
है । |
| श्रमनीति का मार्ग हमारा, सुख समृध्दि
लायेगा । 1 । |
| भारतीय मज़दूर संघ अब, सबको राह
दिखायेगा । |
| त्याग तपस्या बलिदानों से, गलत
नीति को बदलेंगे । |
| मानवता के आधारों पर, नई नीति अपनायेंगे
। |
| ज्ञान एकता विशुध्द जीवन विश्व
शांति अपनायेंगे । 2 । |
| भारतीय मज़दूर संघ अब, सबको राह
दिखायेगा । |
| संभल के रहना देश द्रोहियों, टक्कर
हमसे होनी है । |
| हार तुम्हारी जीत हमारी, यही बात
अब होनी है । |
| नील गगन मै मज़दूर की भगवा ध्वज
लहरायेगा । 3 । |
| भारतीय मज़दूर संघ अब, सबको राह
दिखायेगा । |
| यह झण्डा हे प्रेरक अपना, साक्षी
है गत वैभव का । |
| भविष्य अपना उज्जवल एक करेंगें,
दिन सुनहरा आयेगा । 4 । |
| भारतीय मज़दूर संघ अब, सबको राह
दिखायेगा । |
| जाग उठा मज़दूर देश का, परिवर्तन
अब आयेगा । |
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| अब भारत में मज़दूरों का, भगवा,
ध्वज लहरायेगा । |
| हर श्रमिक जब राष्ट्र भक्ति की,
ज्वाला में तप जायेगा । |
| चक्र-मुष्टि-गेहुं की बाली के,
संग जब भगवा डोलेगा । |
| तब देखो भारत में फिर से, राम राज
आ जायेगा । |
| स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र, ही
अर्थनीति बन जायेगी । |
| श्रम नीति भी स्वतंत्र होगी, तब
समृधि आयेगी । |
| श्रम – धन और उत्पादन को जब, पूर्ण
न्याय मिल पायेगा ।1। तब देखो भारत ........ |
| जो श्रम का अपमान करेगा, वह उसका
फल पायेगा । |
| राष्ट्र भक्ति की कसौटियों पर उसको
तौला जायेगा । |
| संगठित होकर श्रमिक यह चमत्कार
दिखलायेगा ।2। तब देखो भारत ........ |
| किसान अपना भाग्य लिखेगा, अपने
हल की नोकों से । |
| मज़दूर का सम्मान बढेगा, बहते हुए
पसीने से । |
| हम ही है सब भाग्य विधाता, जन-गन-मन
जब गायेगा ।3। तब देखो भारत ........ |
| भगवे ध्वज की त्याग तपस्या, बलिदानें
को परम्परा । |
| पुरखों ने भी अपने खून से है, इतिहास
लिखा सारा । |
| भारत माता की जय हो, यह नारा गगन
गुंजायेगा । 4 । |
| तब देखो भारत मे फिर से राम राज
आ जायेगा । |
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| हमको अपने केसरिया पर, बहुत बड़ा
अभिमान है । |
| अर्पित इस पर प्राण है, न्योछावर
इस पर जान है ॥ |
| जिसने इस को पहन लिया है उसे सब
कुछ त्याग दिया । |
| सारे बन्धन तोड़ फिर मांनव का कल्याण
किया । |
| ना तेरा ना मेरा इसमें प्राणी सभी
समान है । |
| हमको अपने केसरिया पर................ |
| त्याग तपस्या बलिदानों की बन गई
इससे परम्परा । |
| मातृभूमि के आंगन में है खून से
रंग दी मिल के धरा । |
| लाल हुए सब अंग-अंग, नभ लाली भोर
समान है ॥ |
| हमको अपने केसरिया पर ..............
|
| युगों-युगों से इसे पहन कर बलिदानों
की पाँत बढी । |
| एक बार तो देख के इनको मौत ठिठक
कर दूर खड़ी । |
| जन्म मिले यह एक बार, नहीं मिलता
बारम्बार है । । |
| हमको अपने केसरिया पर ..............
|
| अन-धन-जन की कमी रहे ना, अपने बल
पर करे क्षमा । |
| सब मिल कर उत्थान करेंगे-अन्याई
को मिले सजा । |
| भारत माता के वीरों की महिमा अपरम्पार
है । |
| हमको अपने केसरिया पर ................ |