ओडिशा में भारतीय मजदूर संघ की विशाल मजदूर आक्रोश रैली में लगभग 60 हजार से अधिक मजदूर हिस्सा लेते हुए प्रदेश सरकार का जमकर किया बिरोध। भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर 15 नवंबर को 2023 को ओडिशा के हजारों मजदूरों ने भुवनेश्वर की विधानसभा की समक्ष विशाल विरोध प्रदर्शन कर अपना गुस्सा जाहिर किया।

ओडिशा में भारतीय मजदूर संघ की विशाल मजदूर आक्रोश रैली में लगभग 60 हजार से अधिक मजदूर हिस्सा लेते हुए प्रदेश सरकार का जमकर किया बिरोध। भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर 15 नवंबर को 2023 को ओडिशा के हजारों मजदूरों ने भुवनेश्वर की विधानसभा की समक्ष विशाल विरोध प्रदर्शन कर अपना गुस्सा जाहिर किया।

भुबनेश्वर: ओडिशा में भारतीय मजदूर संघ की विशाल मजदूर आक्रोश रैली में लगभग 60 हजार से अधिक मजदूर हिस्सा लेते हुए प्रदेश सरकार का जमकर किया बिरोध।
भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर 15 नवंबर को 2023 को ओडिशा के हजारों मजदूरों ने भुवनेश्वर की विधानसभा की समक्ष विशाल विरोध प्रदर्शन कर अपना गुस्सा जाहिर किया।
भारतीय मजदूर संघ प्रदेश की नेतृत्व में बिभिन्न कार्य में नियोजित हजारों मजदूरों ने राममंदिर चौक से एक विशाल रैली के माध्यम से भुबनेश्वर लोयर पीएमजी में पहुंच कर श्रमिक आक्रोश समावेश में शामिल हुए। समावेश सुबह 11 वजे सुरु होकर शाम के 4 वजे तक चला। इस क्रम में ओडिशा के मान्यवर राज्यपाल, और मुख्यमंत्री के उद्देश्य से मजदूरों के बहु प्रतीक्षित मांगो को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है।
गौरतलब है कि, पिछले दो वर्षों से भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध विभिन्न संगठन, जैसे आंगनवाड़ी, आशा, बिजली, निर्माण श्रमिक पाचिका, परिवहन श्रमिक, असंगठित निर्माण श्रमिक, शिक्षक, ग्राम साथी, स्वयं सहायिका समूह, निर्माण श्रमिक राज्य उद्यम, निजी उद्यम और अन्य शिल्प , खदानों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों ने ओडिशा सरकार के समक्ष अपनी मांग करते आ रहे हैं, परंतु सरकार मजदूरों को उपेक्षा करते आ रही है।
इसी कारणों से प्रदेश कार्यसमिति की सहमति से 15 नबंवर को इस विरोध प्रदर्शन भारतीय मजदूर संघ, ओडिशा राज्य की ओर से आयोजित किया गया था।
ओडिशा राज्य सरकार का वादा ख़िलापी के कारण मजदूरों में आक्रोश उसी दिन आंदोलन के दौरान प्रतीत हुई। सरकार वादा करने के बावजूद किसी भी मांग को पूरा नहीं किया था।
सभी स्किम श्रमिकों के लिए वेतन वृद्धि, असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, अनुबंध श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 28,000, अस्थायी नौकरियों में स्थायी रोजगार, अनुबंध श्रमिकों के लिए अन्य राज्यों की तरह विशेष वेतन, राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्किम(OPS), सार्वजनिक उपक्रम के कर्मचारियों के लिए उच्चत्तर पेंशन लागू, ईएसआईसी और ईपीएफओ के तहत प्रत्येक कर्मचारी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान, ठेकेदारी प्रथा के अंधानुकरण पर रोक लगाई जाए तथा ठेका कानून विनियमन एवं उन्मूलन अधिनियम 1970 में आवश्यक संशोधन किया जाना, देश के आर्थिक विकास के लिए राष्ट्रीय श्रम नीति लायी जाये, न्यूनतम मजदूरी के स्थान पर जीवन निर्वाह मजदूरी की शुरूआत करने की मांग इत्यादि को लेकर प्रदर्शन किया गया था।
समावेश में संगठन सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, यदि राज्य व केंद्र सरकार के कर्मचारियों, बैंक मित्र सभी स्किम वर्कर आदि कर्मचारियों की मांगें समय से पहले पूरी नहीं की जाएगा तो, भारतीय मजदूर संघ आने वाले दिन में वर्तमान राज्य सरकार के खिलाफ आवाज उठाएगी और सत्ता परिवर्तन के लिए पूरी ताकत लगा देगी।
मजदूर आक्रोश समावेश की अध्यक्षता भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री पृथ्वीराज पंडा जी द्वारा किया गया था, जहाँ प्रदेश महामंत्री श्री बिनय कुमार त्रिपाठी जी मंच संचालन किए थे। इस समावेश/ रैली में राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री गणेश मिश्रा जी प्रदेश भर चल रही श्रमिक विरोधी गतिविधियों और सरकार की मजदूर विरोधी मंशा के बारे में मीडिया और मजदूरों को गिनाए और दृढ़ता से अपने उद्बोधन में प्रतिवाद भी किए। इस समावेश में सभी संगठन के प्रमुखों ने मजदूर विरोधी सरकार की नीतियों का विरोध किए। इस अवसर पर क्षेत्रीय संगठन मंत्री, श्रीमान गिरीश महंता जी ने समाज की हर वर्ग के मजदूर प्रदेश सरकार के काम से असंतुष्ट है और राज्य सरकार प्रदेश भर नशा को बढ़ाबा देने को लेकर सरकार की रवैया को भ्रत्सना किए। प्रदेश उपाध्यक्ष श्री श्रीनिवास राव, संपादक शांतनु महापात्र, हिमांशु बल, योगेश दास, सुमिता महापात्र प्रमुखों ने सरकार और प्रशासनिक निष्क्रियता के समंध अपना उदबोधन प्रस्तुत किए हैं। आखिर में प्रदेश उपाध्यक्ष श्री बादल महरणा जी प्रदेश के तरफ से धन्यवाद देने का साथे साथ आने वाले समय में आंदोलन को और तीव्र करने की आवश्यकता को बात रखते हुए समावेश समाप्ति की घोषणा किए। इस समावेश में प्रदेश की सभी जिलों से 70 से अधिक संगठन भाग लिए थे और लगभग 60 हजार से मजदूर इस आंदोलन सामिल हुए थे।

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